ॐ नम शिवाय शिवरात्रि शायरी सावन स्पेशल
शिव तेरी महिमा, जाए नहीं बखानी
तूने पिया हलाहल, नीलकंठ शिवदानी
चरणों की अमृतधारा, छु ले वो तर जाए
सर से हरदम बहे, शीतल गंगा पानी
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शिव भोले सर चन्द्रमा, गले नाग लिपटाए
तिन लोक के हे स्वामी, तुझमे सब ही समाए
बिलपत्र और दूध से, करे तेरा अभिषेक
हर संकट हर बाधा से, शिवजी उसे बचाए
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करुणाकर वो अंतर्यामी, महाकाल शिवराज
शुभ दिन है पावन घडी, करो सुमिरन आज
सिद्ध करे सकल मनोरथ, भोला है दीनदयाल
शिव सुमिरन से ही बनते, बिगड़े सारे काज
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